बद्रीनाथ चढ़ावा प्रकरण पर पूर्व विधायक मनोज रावत के गंभीर आरोप, बीकेटीसी अध्यक्ष पर उठाए सवाल
निजी सचिव पर लगे आरोपों के बावजूद देरी से FIR दर्ज होने पर सियासी घमासान
चमोली ।
श्री बद्रीनाथ धाम में कथित चढ़ावा चोरी के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। केदारनाथ के पूर्व विधायक मनोज रावत ने बीकेटीसी (बदरी-केदार मंदिर समिति) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मनोज रावत ने आरोप लगाया कि अगर हेमंत द्विवेदी के निजी होटलों में चार बोतल शराब की भी चोरी हो जाए, तो तुरंत पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दी जाती है, लेकिन बद्रीनाथ धाम जैसे आस्था के केंद्र में चढ़ावे की चोरी के मामले में देरी क्यों की गई। उन्होंने कहा कि यह मामला 2 मई का है, जब बीकेटीसी अध्यक्ष के निजी सचिव प्रमोद नौटियाल पर चढ़ावा चोरी का आरोप लगा, लेकिन इसकी एफआईआर 8 मई को दर्ज कराई गई।
पूर्व विधायक ने इस देरी को संदिग्ध बताते हुए कहा कि इससे साफ संकेत मिलता है कि आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बीच का समय जानबूझकर दिया गया, ताकि चोरी से जुड़े सामान को ठिकाने लगाया जा सके और सबूतों को कमजोर किया जा सके।
मनोज रावत ने यह भी कहा कि जिस तरह से पूरे मामले को संभाला गया, उससे बीकेटीसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने मांग की कि इस मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
उन्होंने सरकार और प्रशासन से भी सवाल करते हुए कहा कि आखिर धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर इतनी लापरवाही क्यों बरती जा रही है। बद्रीनाथ धाम देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, ऐसे में इस तरह की घटनाएं और उन पर देरी से कार्रवाई बेहद चिंताजनक है।
अब देखना होगा कि इस पूरे मामले में जाँच एजेंसी क्या कदम उठाती है और क्या जांच के जरिए सच्चाई सामने आ पाती है या नहीं।



