हरिद्वार भूमि घोटाला: धामी सरकार का बड़ा एक्शन, तीन अधिकारियों पर कसा शिकंजा
देहरादून/हरिद्वार।
हरिद्वार में सामने आए करोड़ों रुपये के चर्चित भूमि खरीद घोटाले में धामी सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई तेज कर दी है। इस मामले में पहले से सस्पेंड चल रहे आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के खिलाफ अब शासन स्तर पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति कर दी गई है।
सरकार ने तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार आईएएस कर्मेन्द्र सिंह पर मेजर पेनल्टी लगाने की संस्तुति की है, जबकि तत्कालीन नगर आयुक्त आईएएस वरुण चौधरी को सेवा से बर्खास्त करने की सिफारिश की गई है। इसके लिए केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को प्रस्ताव भेजा गया है, जिससे इस मामले की गंभीरता साफ झलकती है।
इसके अलावा, तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाते हुए तीन वेतन वृद्धि रोकने और अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
क्या है पूरा मामला?
हरिद्वार में जमीन खरीद से जुड़े इस घोटाले में सरकारी नियमों की अनदेखी कर करोड़ों रुपये के लेन-देन किए जाने के आरोप हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि भूमि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शासन की इस कार्रवाई को प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल इस पूरे मामले में विजिलेंस जांच जारी है और माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कई और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, जल्द ही आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के साथ गिरफ्तारी की कार्रवाई भी हो सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस करोड़ों के घोटाले में और कौन-कौन शामिल है? क्या यह मामला सिर्फ कुछ अधिकारियों तक सीमित है या इसके तार किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं?
जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही इस पूरे घोटाले की असल तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी, लेकिन फिलहाल सरकार की कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि इस बार किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।



