चमोली में वनाग्नि से निपटने के लिए तैयारी शुरू, जिलाधिकारी के नेतृत्व में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

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चमोली में वनाग्नि से निपटने के लिए तैयारी शुरू, जिलाधिकारी के नेतृत्व में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित ।

चमोली :  जिला पंचायत सभागार में वनाग्नि रोकथाम के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है। जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने कहा कि वनाग्नि घटनाओं को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। उन्होंने बताया कि चमोली जिले में 6 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र है, जिसमें से 3 लाख हेक्टेयर अति संवेदनशील है।

जिलाधिकारी ने कहा कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए 106 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं, जिनमें 473 फायर वाचर तैनात किए जाएंगे। जिले में 441 किलोमीटर में फायर लाइन की सफाई करवाई जा रही है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में वन पंचायत सरपंच, ग्राम प्रधान, महिला एवं युवक मंगल दलों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने कहा कि वनाग्नि रोकने में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को जनपद के कार्यक्रमों में सम्मानित किया जाएगा। जंगल में आग लगाने वालों की गोपनीय सूचना देने पर 10 हजार का पुरस्कार दिया जाएगा।

प्रभागीय वनाधिकारी सर्वेश कुमार दुबे ने कहा कि पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश प्रकृति के मूल तत्व एवं हमारी सृष्टि के आधार है। हम इन्हें बना नहीं सकते, केवल बचा सकते है। वन और वन्य जीवों की सुरक्षा से इनकी सुरक्षा होती है। इसलिए वनाग्नि और वन को क्षति पहुंचाने वाले अन्य कारकों के नियंत्रण में सभी लोग प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने बताया कि चमोली जिले में विगत वर्ष वनाग्नि की 228 घटनाएं हुई थीं। जिले में अधिक वन क्षेत्र, वनों का दुर्गम क्षेत्रों में स्थित होना और मानव संसाधनों के अभाव के कारण वनाग्नि की रोकथाम में व्यावहारिक कठिनाई रहती है।

प्रशिक्षण गोष्ठी में मुख्य विकास अधिकारी नंदन कुमार, उप वन प्रभागीय अधिकारी जुगल किशोर, एसडीओ विकास, वन विभाग के रेंज अधिकारी सहित वन पंचायत सरपंच, ग्राम प्रधान, महिला एवं युवक मंगल दलों के अध्यक्ष एवं सदस्य उपस्थित थे।

 

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