लखनऊ में बीकेटीसी अध्यक्ष की राज्यपाल व मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट, चारधाम यात्रा का दिया आमंत्रण

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लखनऊ में बीकेटीसी अध्यक्ष की राज्यपाल व मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट, चारधाम यात्रा का दिया आमंत्रण

देहरादून/लखनऊ, 28 फरवरी। पर्यटन, धर्मस्व, संस्कृति, सिंचाई एवं लोकनिर्माण विभाग मंत्री सतपाल महाराज की उपस्थिति में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने शनिवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उन्होंने आगामी चारधाम यात्रा तथा श्री बदरीनाथ-केदारनाथ धाम की यात्रा हेतु औपचारिक आमंत्रण भी दिया। बैठक में पर्यटन एवं तीर्थाटन को बढ़ावा देने से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री से भेंट के दौरान बीकेटीसी अध्यक्ष ने जानकारी दी कि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से प्रारंभ हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में श्री केदारनाथ धाम का भव्य पुनर्निर्माण किया गया है, जबकि श्री बदरीनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्य प्रगति पर है। इस यात्रा वर्ष में श्री केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल तथा श्री बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जाएंगे।

भूमि विनिमय प्रस्ताव पर चर्चा

भेंट के दौरान बीकेटीसी अध्यक्ष ने समिति की लखनऊ तथा हंसुवा–फतेहपुर स्थित भूमि एवं भवनों के विनिमय संबंधी प्रस्ताव पर एक पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा। प्रस्ताव के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार को उक्त संपत्तियाँ समाहित कर उनके स्थान पर हरिद्वार, देहरादून एवं ऋषिकेश में उपलब्ध भूमि बीकेटीसी को प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया।

यूपी में बीकेटीसी की संपत्तियाँ

अध्यक्ष ने बताया कि लखनऊ के अमीनाबाद–गड़बड़झाला क्षेत्र में समिति की लगभग 11,000 वर्गफीट भूमि है, जिस पर तीन पुराने भवन और एक छोटा पूजा स्थल स्थित है। इसके अतिरिक्त लखनऊ से लगभग 90 किमी दूर हंसुवा (फतेहपुर) में 51,452 वर्गफीट का बगीचा तथा 24,025 वर्गफीट क्षेत्र में 43 दुकानें, दो गोदाम और खाली भूमि स्थित है। इस प्रकार उत्तर प्रदेश में समिति की कुल 86,477 वर्गफीट संपत्ति है।

उन्होंने बताया कि इन संपत्तियों से वर्तमान में कोई आय नहीं हो रही है, जबकि रखरखाव पर व्यय अधिक है। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद दूरी के कारण इन स्थलों की देखभाल प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रही है, जिससे भूमि पर अतिक्रमण एवं भू-माफियाओं की नजर का खतरा बना हुआ है।

बैठक को चारधाम यात्रा की तैयारियों तथा तीर्थ पर्यटन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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