चमोली: फ्यूंला नारायण मंदिर के कपाट खुले, अनोखी परंपरा आज भी जीवित

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चमोली: फ्यूंला नारायण मंदिर के कपाट खुले, अनोखी परंपरा आज भी जीवित

चमोली।

जोतिर्मठ ब्लॉक में स्थित प्रसिद्ध भगवान फ्यूंला नारायण मंदिर के कपाट आज श्रद्धालुओं के लिए विधिवत खोल दिए गए। लगभग 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह प्राचीन मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है।

इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां पुरुष पुजारी के साथ-साथ महिला पुजारी भी भगवान नारायण की सेवा करती हैं। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है।

 धार्मिक महत्व और परंपराएं

मंदिर में भगवान नारायण चतुर्भुज रूप में विराजमान हैं, जिनके साथ माता महालक्ष्मी तथा जय-विजय द्वारपाल के रूप में उपस्थित हैं। इसके अलावा क्षेत्रपाल, घंटाकर्ण और नंदा-सुनंदा देवियों की पूजा भी यहां विशेष रूप से की जाती है।

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भगवान नारायण को सातूं वाड़ी का भोग अत्यंत प्रिय माना जाता है। यहां पूजा-पद्धति आज भी ऋषि परंपरा के अनुसार ही संपन्न होती है।

कपाट खुलने और बंद होने की परंपरा

हर वर्ष मंदिर के कपाट श्रावण संक्रांति (लगभग 15–16 जुलाई) को खोले जाते हैं और नंदा अष्टमी की नवमी तिथि को बंद कर दिए जाते हैं। यह परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है।

पूजा व्यवस्था और पुजारी

मंदिर में पुजारी नियुक्ति की परंपरा भी विशेष है। भरकी, पिलखी, गंवाणा और अरोसी गांवों के लोग बारी-बारी से हर वर्ष एक परिवार को पुजारी नियुक्त करते हैं।
इस वर्ष मंदिर के पुजारी अशिष पंवार और महिला पुजारी आनंदी देवी हैं। खास बात यह है कि भगवान नारायण के श्रृंगार का अधिकार महिला पुजारी को ही होता है।

प्राकृतिक सौंदर्य

चारों ओर घने जंगलों और हरियाली से घिरा यह मंदिर अत्यंत मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है। प्रकृति की गोद में स्थित यह धाम श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ अद्भुत अनुभव भी प्रदान करता है।

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 यात्रा मार्ग और सुविधाएं

  • ऋषिकेश से बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के माध्यम से हेलंग तक लगभग 240 किमी की दूरी तय की जा सकती है।
  • हेलंग से उर्गम होते हुए भरकी गांव तक करीब 14 किमी सड़क मार्ग है।
  • इसके बाद लगभग 5 किमी पैदल यात्रा कर मंदिर तक पहुंचा जाता है।

यात्रियों के लिए मंदिर परिसर में सामान्य ठहरने की व्यवस्था उपलब्ध रहती है। भोजन के लिए भंडारे की व्यवस्था भी हो जाती है, लेकिन श्रद्धालुओं को अपनी आवश्यक सामग्री और गर्म कपड़े साथ रखने की सलाह दी जाती है। भरकी गांव से गाइड भी उपलब्ध हो जाते हैं।

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कपाट खुलने के अवसर पर भरकी के प्रधान चंद्र मोहन सिंह, पूर्व प्रधान दुर्लभ सिंह रावत, लक्ष्मण सिंह, पंचनाम देवता के पुजारी अब्बल सिंह पंवार, आचार्य मनोहर प्रसाद सेमवाल सहित फ्रेंड्स ग्रुप के 25 से अधिक कार्यकर्ताओं ने मंदिर सजाने में योगदान दिया।

इसके अलावा मेला समिति के कोषाध्यक्ष नंद सिंह नेगी, दीपा देवी, आशुतोष नेगी, जितेंद्र पंवार, जितेंद्र कंडवाल, किशन सिंह, रणजीत सिंह समेत कई स्थानीय लोग मौजूद रहे।

 

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