बद्रीनाथ धाम में विवाद गहराया: मंदिर के सामने अख़बारों के बोर्ड, चढ़ावा गड़बड़ी के बीच मैनेज करने के आरोप

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बद्रीनाथ धाम में विवाद गहराया: मंदिर के सामने अख़बारों के बोर्ड-चढ़ावा गड़बड़ी के बीच मैनेज करने के आरोप

चमोली (बद्रीनाथ)

चमोली देश के चारों धामों में से एक प्रमुख धाम श्री बद्रीनाथ धाम इन दिनों लगातार विवादों में घिरता जा रहा है। ताजा मामला मंदिर के ठीक सामने दो दैनिक अखबारों के बोर्ड लगाए जाने का है, जिसने श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और अन्य मीडिया संस्थानों में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। जिस स्थान को करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र माना जाता है, वहां इस तरह निजी अखबारों का प्रचार-प्रसार होना लोगों को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं है और इसे मंदिर की गरिमा के खिलाफ माना जा रहा है।

मंदिर के मुख्य द्वार के सामने लगाए गए इन बोर्डों को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने इसकी अनुमति कैसे दी। लोगों का कहना है कि इससे यह संदेश जा रहा है कि मंदिर किसी विशेष मीडिया समूह के प्रभाव में काम कर रहा है। साथ ही अन्य समाचार एजेंसियों को फोटो और वीडियो कवरेज करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे निष्पक्ष मीडिया व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

सूत्रों के अनुसार, मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और संबंधित अखबारों के संपादकों के बीच करीबी संबंध बताए जा रहे हैं। इसी वजह से इन बोर्डों को मंदिर के सामने लगाने की अनुमति दी गई, जबकि इस समय चढ़ावा गड़बड़ी का मामला पहले से ही चर्चा में है। ऐसे में इसे पूरे विवाद को मैनेज करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

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यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब बद्रीनाथ/केदारनाथ मंदिर समिति पहले से ही कई गंभीर आरोपों से घिरी हुई है। 17 मार्च 2026 को समिति के पूर्व सीईओ विजय थालियाल को हटाया जाना,

जिसके बाद 23 अप्रैल 2026 को कपाट खुलने के दिन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ऋषिप्रसाद सती के बीच विवाद भी सामने आया। इसके बाद प्रमोद नौटियाल को बद्रीनाथ धाम में तैनात किया गया जो कि अध्यक्ष के निजी सचिव भी बताए जाते हैं। उनकी इस तैनाती के बाद उन पर भी वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगे जिससे पूरा मामला और अधिक गंभीर हो गया है।

इसी बीच एक और बड़ा खुलासा सामने आया है जिसमें दावा किया गया है कि विभिन्न निजी और सरकारी बैंकों द्वारा दिए गए लैपटॉप कर्मचारियों के पास चले गए लेकिन उनका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड मंदिर समिति के पास मौजूद नहीं है। इस तरह के आरोप समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बीच अब लोगों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि यह पहली बार देखने को मिल रहा है कि बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का कोई अध्यक्ष देश के चार धामों में से प्रमुख धाम बद्रीनाथ जी को अपने निजी घर की तरह समझ रहा है और मनमर्जी से फैसले ले रहा है। मंदिर जैसे पवित्र स्थल पर इस तरह के निर्णयों को लेकर लोगों में गहरी नाराजगी है और इसे आस्था के साथ खिलवाड़ बताया जा रहा है।

पूरे घटनाक्रम ने श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत किया है और अब मांग उठ रही है कि मंदिर परिसर से तुरंत ऐसे अखबारों के बोर्ड हटाए जाएं साथ ही चढ़ावा और अन्य सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन चुका है, जिस पर पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी हो गई है।

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