रंगमंच से सिनेमा तक चमके दून विश्वविद्यालय के सितारे, YUCA 2026 में सुनील सिंह और डॉ. कैलाश कंडवाल सम्मानित
देहरादून। उत्तराखंड की कला, रंगमंच और सिनेमा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दून विश्वविद्यालय से जुड़े दो कलाकारों ने युवा उत्तराखंड सिने अवॉर्ड (YUCA) 2026 में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। एमए थिएटर द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी एवं अभिनेता-रंगकर्मी सुनील सिंह को फिल्म ‘रैबार’ में मुख्य भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और थिएटर विभाग के फैकल्टी सदस्य एवं वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. कैलाश कंडवाल को गढ़वाली फिल्म- घपरोल, में अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ खलनायक का पुरस्कार मिला।
‘रैबार’ के लिए सुनील सिंह को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
टिहरी गढ़वाल के नौघर गांव निवासी सुनील सिंह का अभिनय से जुड़ाव बचपन से रहा है। उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज लमगांव से 12वीं की शिक्षा पूरी करने के बाद देहरादून से स्नातक किया। अभिनय के प्रति जुनून उन्हें मुंबई तक ले गया, जहां उन्होंने विभिन्न अभिनय कार्यशालाओं के माध्यम से प्रशिक्षण हासिल किया। इसके बाद वे लगातार थिएटर और स्ट्रीट प्ले से जुड़े रहे।
सुनील सिंह हिंदी वेब सीरीज ‘गन्स एंड गुलाब्स’ के साथ ही कई डॉक्यूमेंट्री और गढ़वाली फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। फिल्म ‘ढोली’ में उन्होंने कास्टिंग डायरेक्टर, लाइन प्रोड्यूसर और सहायक के रूप में भी काम किया है।
YUCA 2026 में फिल्म ‘रैबार’ के लिए सुनील सिंह को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। फिल्म ने आठ नामांकनों में से सात पुरस्कार अपने नाम किए। फिल्म की टीम को एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी प्रदान की गई। सुनील सिंह की आगामी फिल्मों में ‘चंद्रा’ और ‘ढोली’ शामिल हैं।

34 वर्षों से रंगमंच और सिनेमा से जुड़े हैं डॉ. कैलाश कंडवाल
दून विश्वविद्यालय के थिएटर विभाग में फैकल्टी के रूप में कार्यरत वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. कैलाश कंडवाल पिछले 34 वर्षों से रंगमंच और सिनेमा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्हें गढ़वाली फिल्म ‘घपरोल’ में अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ खलनायक का पुरस्कार प्रदान किया गया।

डॉ. कंडवाल ‘पान सिंह तोमर’, ‘यारा’, ‘रोटू का राज’, ‘पिंटी का साबुन’, ‘अंजवाल’, ‘दुनाली’ और ‘वापसी’ सहित कई फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने ‘सावधान इंडिया’, ‘CID’ जैसे टीवी धारावाहिकों और ‘गन्स एंड गुलाब्स’ वेब सीरीज में भी अभिनय किया है।
रंगमंच के क्षेत्र में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कई नाटकों का निर्देशन और अभिनय किया है। उनके द्वारा अनूदित एवं अडॉप्ट किए गए ‘रिफंड’ नाटक का 50 से अधिक बार मंचन हो चुका है। वे 15 से अधिक बाल रंगमंच कार्यशालाओं का आयोजन कर चुके हैं और पांच बाल नाटकों का लेखन भी किया है।
दोनों कलाकारों की उपलब्धि पर दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सुनील सिंह और डॉ. कैलाश कंडवाल को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों की ऐसी उपलब्धियां न केवल संस्थान का गौरव बढ़ाती हैं, बल्कि उत्तराखंड की कला, संस्कृति और सिनेमा को भी नई पहचान दिलाती हैं।
आईक्यूएसी (IQAC) के निदेशक प्रो. एच.सी. पुरोहित ने भी दोनों कलाकारों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि रंगमंच और सिनेमा के क्षेत्र में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी विश्वविद्यालय में रचनात्मक और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देती है।
इस अवसर पर कुलसचिव दुर्गेश डिमरी, प्रो. आर.पी. ममगाईं, प्रो. एच. हर्ष डोभाल, प्रो. राजेश कुमार, प्रो. चेतना पोखरियाल, डॉ. राजेश भट्ट, डॉ. अजीत पंवार सहित विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने भी दोनों कलाकारों को बधाई दी।
सुनील सिंह और डॉ. कैलाश कंडवाल की यह उपलब्धि उत्तराखंड के रंगमंच और क्षेत्रीय सिनेमा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों कलाकार लोकभाषा, संस्कृति और स्थानीय कहानियों को रंगमंच और सिनेमा के माध्यम से व्यापक मंच देने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।







