
दुर्गम क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा, 7 प्राथमिक विद्यालयों में लगाए गए स्मार्ट टीवी
चमोली : दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए स्टरलाइट एडइंडिया फाउंडेशन एवं समग्र शिक्षा उत्तराखंड के सहयोग से जनपद चमोली के नंदा नगर विकासखंड के सात राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट टीवी स्थापित किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य प्राथमिक स्तर पर विद्यार्थियों को तकनीक आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ना है।

कार्यक्रम का उद्घाटन राजकीय प्राथमिक विद्यालय बंगाली, नंदानगर (चमोली) में आयोजित समारोह में एनजीओ नोडल अधिकारी डॉ. बी. पी. मैंदोली द्वारा किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के अधिकारी, विद्यालय प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने विद्यालय में स्थापित स्मार्ट टीवी के माध्यम से “परीक्षा पे चर्चा–2026” कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा, जिससे डिजिटल शिक्षा के प्रभावी उपयोग का व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत हुआ।
स्मार्ट टीवी के माध्यम से शिक्षकों को दृश्य-आधारित शिक्षण सामग्री, पाठ्यक्रम आधारित डिजिटल कंटेंट एवं इंटरैक्टिव संसाधनों का उपयोग करने में सुविधा मिलेगी, जिससे विद्यार्थियों की समझ, रुचि और शैक्षणिक उपलब्धियों में सकारात्मक सुधार होगा।

इन विद्यालयों को मिला डिजिटल संसाधन
- रा. प्रा. विद्यालय, लांखी
- रा. प्रा. विद्यालय, सरपानी
- रा. प्रा. विद्यालय, बंगाली
- रा. प्रा. विद्यालय, पगना
- रा. प्रा. विद्यालय, कुण्डबगड़
- रा. प्रा. विद्यालय, नारंगी
- रा. प्रा. विद्यालय, सुतोल
कार्यक्रम में समग्र शिक्षा के जिला समन्वयक श्री प्रदीप बिष्ट, लेखाकार श्री प्रकाश गौड़, ब्लॉक रिसोर्स पर्सन सुश्री अंकिता बिष्ट, क्लस्टर रिसोर्स पर्सन श्री दलबीर सिंह बिष्ट सहित विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधि, अभिभावक एवं स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
स्टरलाइट एडइंडिया फाउंडेशन की ओर से टेक्नोलॉजी लीड श्री वरुण भामरे एवं प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर डॉ. अजय सिंह ने तकनीक आधारित शिक्षण के महत्व पर अपने विचार साझा किए।
मुख्य अतिथि डॉ. बी. पी. मैंदोली ने कहा कि स्टरलाइट एडइंडिया फाउंडेशन द्वारा की गई यह पहल दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वहीं श्री वरुण भामरे ने इसे शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने वाला बताया।



