बद्रीनाथ धाम में BKTC के अस्थायी कर्मचारियों का आंदोलन शुरू, वन टाइम सेटलमेंट और नियमितीकरण की मांग
20 से 30 वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों ने उठाई नियमितीकरण और समान कार्य-समान वेतन की मांग, बद्रीश पंडा पंचायत ने दिया समर्थन
चमोली। बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के अस्थायी कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर बद्रीनाथ धाम में आंदोलन शुरू कर दिया है। बुधवार को 50 से अधिक अस्थायी कर्मचारी सिंहद्वार के सामने दो घंटे के क्रमिक अनशन पर बैठे। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में वन टाइम सेटलमेंट लागू करना, नियमितीकरण और समान कार्य के लिए समान वेतन देना शामिल है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले 20, 25 और यहां तक कि 30 वर्षों से बदरी-केदार मंदिर समिति में विभिन्न पदों पर सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इतने लंबे समय बाद भी उन्हें नियमित नहीं किया गया है। चारधाम की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम के बीच श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे इन कर्मचारियों का आरोप है कि लंबे समय से काम करने के बावजूद उन्हें अपेक्षित वेतन और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
बुधवार को बद्रीनाथ धाम में बाबू, वेदपाठी, स्वयंसेवक, स्थिर वेतन, पर्यावरण मित्र, बाजीगर सहित विभिन्न पदों पर कार्यरत 50 से अधिक अस्थायी कर्मचारी अनशन पर बैठे। इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार और मंदिर समिति से अपनी मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की।

मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी नहीं हुआ समाधान
अस्थायी कर्मचारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व में उन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान वेतन और सुविधाएं देने का आश्वासन दिया था। हालांकि, उनके अनुसार अभी तक इस दिशा में कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। कर्मचारियों ने कहा कि दशकों से सेवाएं देने के बावजूद उन्हें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों ने मांग की कि सरकार और BKTC प्रबंधन वन टाइम सेटलमेंट तथा नियमितीकरण के मुद्दे पर जल्द फैसला लें, ताकि लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को राहत मिल सके।
बद्रीश पंडा पंचायत ने दिया समर्थन
अस्थायी कर्मचारियों के आंदोलन को बद्रीश पंडा पंचायत ने भी समर्थन दिया है। पंचायत के पदाधिकारी अनशन स्थल पर पहुंचे और कर्मचारियों की मांगों को जायज बताते हुए उनके साथ खड़े रहने की बात कही।
बद्रीश पंडा पंचायत के अध्यक्ष प्रवीण ध्यानी ने कहा कि BKTC के अस्थायी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे हैं। श्री बद्रीश पंडा पंचायत भी उनकी मांगों से जुड़कर आंदोलन का समर्थन कर रही है।
वहीं, BKTC के सदस्य धीरज मोनू पंचभैया और रजनीश मोतीलाल ने भी अनशन स्थल पर पहुंचकर कर्मचारियों से बातचीत की और उनकी समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने कर्मचारियों को मांगों के समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल और जल्द शुभ समाचार मिलने की उम्मीद जताई।
8 से 10 हजार रुपये मानदेय में परिवार चलाना मुश्किल
BKTC के सदस्य धीरज मोनू पंचभैया ने कहा कि बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों को करीब 8,000 से 10,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। मौजूदा महंगाई के दौर में इतनी कम राशि में परिवार का भरण-पोषण करना बेहद मुश्किल है।
उन्होंने कहा कि ये कर्मचारी सुबह तीन से चार बजे से अपनी ड्यूटी शुरू कर देते हैं। यात्रा सीजन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के दौरान उन्हें रात 10 से 11 बजे तक काम करना पड़ता है। इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित आर्थिक लाभ और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
धीरज मोनू पंचभैया के अनुसार, बोर्ड अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के नेतृत्व में तथा उपाध्यक्षों और सदस्यों की सहमति से कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव बोर्ड बैठक में पारित कर शासन को भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से घोषित वन टाइम सेटलमेंट को लागू करने में आ रही प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने और कर्मचारियों के हित में जल्द निर्णय कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
जनवरी में सेवानिवृत्त होने जा रहीं जयश्री पंवार ने बयां किया दर्द
अनशन पर बैठीं मंदिर समिति की अस्थायी कर्मचारी जयश्री पंवार ने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से समान कार्य-समान वेतन और वन टाइम सेटलमेंट लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को लेकर सभी कर्मचारी क्रमिक अनशन पर बैठे हैं।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर कठिन परिस्थितियों में सेवाएं देते हैं और कई बार लगातार 18-18 घंटे तक ड्यूटी करनी पड़ती है। इसके बावजूद उनकी मेहनत के अनुरूप वेतन और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
जयश्री पंवार ने भावुक होते हुए कहा कि उनका सेवानिवृत्त होने का समय नजदीक है और जनवरी में उनका रिटायरमेंट होना है। वह जब नौकरी में आई थीं, तब खाली हाथ थीं और अब भी खाली हाथ ही सेवानिवृत्त होने जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भगवान के दरबार में वर्षों तक सेवा देने के बावजूद कर्मचारियों को अपने भविष्य की चिंता सता रही है।
कर्मचारियों ने सरकार से मानदेय बढ़ाने, वन टाइम सेटलमेंट लागू करने और लंबे समय से लंबित उनकी जायज मांगों का जल्द समाधान करने की अपील की है।
इस दौरान क्रमिक अनशन में सुधाकर बबुलाकर, दीपक जुगरान, रत्नेश पंवार, अमित डिमरी, अनूप उनियाल, योगिता चौहान, अपर्णा देवी, लक्ष्मी, जयश्री पंवार, योगेंद्र, अनूप, अमित बंदोलिया, महावीर चौहान, अमरीश मेहता, राहुल, नरेंद्र, प्रदीप बिष्ट, सम्पत्ति देवी, ओमप्रकाश, प्रकाश भुजवान, विपुल मेहता, प्रमोद, हरीश भंडारी, मकर सिंह, भरत लाल सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।





