श्रीनगर कोतवाली की लापरवाही: इंसाफ के लिए रोती रही महिला, जिम्मेदार बने मूकदर्शक
कोतवाली में छलके आंसू, फिर भी नहीं जागी व्यवस्था
श्रीनगर गढ़वाल। श्रीनगर कोतवाली पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक पीड़ित महिला न्याय की गुहार लगाते-लगाते कोतवाली में ही फूट-फूटकर रोती रही, लेकिन इसके बावजूद पुलिस का रवैया उदासीन बना रहा।
मामला शीतला माता मंदिर रोड भक्तियाना निवासी अनीता बहुगुणा का है, जिनके घर 23 जनवरी को चोरी की घटना हुई थी। करीब आठ तोला सोने के जेवर चोरी हो गए थे। पीड़िता का कहना है कि उन्होंने चोरी करने वाले संदिग्ध के बारे में पुलिस को पहले ही जानकारी दे दी थी, फिर भी कार्रवाई नहीं की गई।
हैरानी की बात यह है कि घटना के कई महीने बीत जाने के बाद भी श्रीनगर कोतवाली पुलिस न तो मामले का खुलासा कर पाई और न ही समय पर मुकदमा दर्ज किया। लगातार गुहार के बाद जब मजबूर होकर पीड़िता एसएसपी पौड़ी सर्वेश पंवार के पास पहुंचीं, तब जाकर 4 मई को केस दर्ज हुआ।
सोमवार को जब पीड़िता अपनी फरियाद लेकर मेयर आरती भंडारी के पास पहुंची, तो वह इतनी व्यथित थी कि रोते-रोते अपनी आपबीती सुना रही थी। मेयर जब उसे लेकर कोतवाली पहुंचीं, तब भी महिला की हालत बेहद खराब थी और वह पुलिस के सामने ही फूट-फूटकर रो पड़ी।

मेयर आरती भंडारी को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा और पुलिस को कड़ी कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने साफ कहा कि इस तरह की ढिलाई और लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बताया जा रहा है कि पुलिस की निष्क्रियता से परेशान होकर पीड़िता आत्महत्या तक की बात कहने लगी थी, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय पुलिस की ओर से समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
इस घटना ने श्रीनगर कोतवाली की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं और आम आदमी को न्याय के लिए भटकना पड़ता है।अब देखना होगा कि मेयर के हस्तक्षेप के बाद भी पुलिस कार्रवाई करती है या नहीं।



