BKTC कर्मचारियों के आंदोलन ने पकड़ा उग्र रूप, 7वें दिन भी क्रमिक अनशन जारी; 26 अक्टूबर से सभी विश्राम गृहों और विद्यालयों में तालाबंदी का ऐलान
कल से 2 के बजाय 5 घंटे चलेगा अनशन, मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन होगा और तेज; वन टाइम सेटलमेंट और समान कार्य-समान वेतन पर आर-पार की लड़ाई के मूड में कर्मचारी
चमोली। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अस्थायी कर्मचारियों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों का अपनी मांगों को लेकर क्रमिक अनशन सातवें दिन भी जारी रहा। सरकार और शासन स्तर पर ठोस निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। कर्मचारियों ने आंदोलन को और तेज करने का ऐलान करते हुए 20 अक्टूबर से अनशन की अवधि दो घंटे से बढ़ाकर पांच घंटे करने तथा 26 अक्टूबर से समिति के अधीन सभी विश्राम गृहों और विद्यालयों में तालाबंदी की चेतावनी दी है।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में वन टाइम सेटलमेंट, समान कार्य-समान वेतन और मुख्यमंत्री घोषणा संख्या 426/2024 का शीघ्र क्रियान्वयन शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले 20 से 30 वर्षों से मंदिर समिति में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनके भविष्य और सेवा संबंधी मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद समाधान नहीं होने से कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
दो घंटे का अनशन अब पांच घंटे, 26 अक्टूबर से तालाबंदी
संयुक्त कर्मचारी संघ ने आंदोलन की अगली रणनीति स्पष्ट कर दी है। मंगलवार, 20 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक कर्मचारी प्रतिदिन सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक सांकेतिक कार्य बहिष्कार और अनशन करेंगे। अब तक दो घंटे चल रहा अनशन बढ़ाकर पांच घंटे किया जाएगा।

कर्मचारियों ने पहले 19 अक्टूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी थी। हालांकि, दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक अनुष्ठानों को प्रभावित होने से बचाने के लिए संघ ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। लेकिन कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि इसे उनकी कमजोरी न समझा जाए। यदि इस अवधि में उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो 26 अक्टूबर से BKTC के सभी विश्राम गृहों और विद्यालयों में तालाबंदी कर आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।
सालों तक सेवा ली, अब मांगों पर चुप्पी क्यों
अनशनकारी कर्मचारी डॉ. अमित बन्दोलिया और राकेश झिकवाण ने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से मंदिर समिति को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उनकी जायज मांगों का समाधान नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि मंगलवार से अनशन की अवधि दो घंटे से बढ़ाकर पांच घंटे की जा रही है। इसके बाद भी यदि सरकार और शासन की ओर से सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो 26 अक्टूबर से समिति के सभी विश्राम गृहों और विद्यालयों में तालाबंदी की जाएगी और विशाल आंदोलन शुरू किया जाएगा।
कर्मचारियों ने कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। उनकी मांग किसी विशेष लाभ की नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा के अनुरूप न्याय, उचित वेतन और भविष्य की सुरक्षा की है।
कर्मचारियों ने राजधर्म निभाने की उठाई मांग
आंदोलनरत कर्मचारियों ने सनातन धर्म और राजधर्म की मर्यादा का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों और उनके आश्रितों के हितों की रक्षा करना शासन की जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो उन्हें आंदोलन और तेज करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
कई लोगों ने पहुंचकर दिया आंदोलन को समर्थन
सातवें दिन के अनशन को बदरीनाथ के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चन्द्र उनियाल, BKTC के पूर्व सदस्य भास्कर डिमरी, मुखिया महाप्रभु बैठक बृजेश पंचभैया, बदरीनाथ के तीर्थपुरोहित अजय बिजल्वाण, बर्फानी बाबा अमृतानंद महाराज सहित कई लोगों ने समर्थन दिया।
इस दौरान राकेश झिकवाण, दीपक जुगरान, रत्नेश पंवार, अमित डिमरी, अनूप उनियाल, योगिता चौहान, अपर्णा देवी, लक्ष्मी, जयश्री पंवार, महावीर चौहान, अमरीश मेहता और प्रदीप बिष्ट समेत कई कर्मचारी मौजूद रहे।
अब निगाहें शासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि कर्मचारियों की मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ, तो 26 अक्टूबर से प्रस्तावित तालाबंदी BKTC के कामकाज और व्यवस्थाओं पर व्यापक असर डाल सकती है।





