टीएचडीसीआईएल ने विष्णुगाड-पिपलकोटी परियोजना में हासिल की बड़ी उपलब्धि, यूनिट-1 के स्टेटर का सफल लोअरिंग

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टीएचडीसीआईएल ने विष्णुगाड-पिपलकोटी परियोजना में हासिल की बड़ी उपलब्धि, यूनिट-1 के स्टेटर का सफल लोअरिंग

पिपलकोटी/चमोली | 17 अप्रैल 2026

THDC India Limited (टीएचडीसीआईएल) ने 444 मेगावाट (4×111 मेगावाट) क्षमता वाली Vishnugad Pipalkoti Hydroelectric Project (वीपीएचईपी) में एक महत्वपूर्ण निर्माण उपलब्धि हासिल की है। 15 अप्रैल 2026 को परियोजना की यूनिट-1 के पूर्ण रूप से संयोजित स्टेटर का सफलतापूर्वक लोअरिंग किया गया, जो परियोजना के कमीशनिंग की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

इस अवसर पर वर्चुअल माध्यम से जुड़े टीएचडीसीआईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक Sipan Kumar Garg ने परियोजना टीम को बधाई देते हुए कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और जटिल इंजीनियरिंग चुनौतियों के बावजूद यह उपलब्धि टीम की तकनीकी दक्षता और समर्पण का परिणाम है।

कार्यक्रम में महाप्रबंधक (टीबीएम/पीएच) के.पी. सिंह, महाप्रबंधक (ईएम) रविन्द्र सिंह राणा, अपर महाप्रबंधक अजय कुमार, ओ.पी. आर्य, एस.पी. डोभाल, उप महाप्रबंधक आर.एस. पंवार, करण बरगली, अनिल राज सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

परियोजना प्रमुख Ajay Verma ने बताया कि स्टेटर का सफल लोअरिंग परियोजना के क्रियान्वयन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो टीमवर्क, सटीक इंजीनियरिंग और सभी हितधारकों के बेहतर समन्वय को दर्शाता है।

महाप्रबंधक (ईएम) आर.एस. राणा ने सीएमडी को परियोजना में चल रही विद्युत-यांत्रिक गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी।

हाइड्रो जनरेटर, जो किसी भी जलविद्युत परियोजना का प्रमुख घटक होता है, मुख्यतः स्टेटर (स्थिर भाग) और रोटर (घूर्णनशील भाग) से मिलकर बना होता है। स्टेटर के माध्यम से विद्युत-चुंबकीय प्रेरण प्रक्रिया द्वारा बिजली का उत्पादन किया जाता है।

जानकारी के अनुसार, यूनिट-1 के स्टेटर का कुल वजन लगभग 170 टन है, जिसे तीन बड़े हिस्सों में परियोजना स्थल तक पहुंचाया गया। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में परिवहन के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसके बाद साइट पर स्टेटर बार इंस्टॉलेशन, हाई वोल्टेज परीक्षण, ब्रेज़िंग, इन्सुलेशन और नियंत्रित ड्राइंग जैसी जटिल प्रक्रियाओं के जरिए इसे तैयार किया गया।

यह उपलब्धि टीएचडीसीआईएल की समयबद्ध परियोजना निष्पादन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है और देश की जलविद्युत क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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