बीकेटीसी अध्यक्ष के बयानों पर बवाल, बहस से बचते दिखे हेमंत द्विवेदी — राम मंदिर फ्रेंचाइज़ी बयान से घिरे
देहरादून: बद्रीनाथ चढ़ावा/चोरी प्रकरण के बाद घिरे बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी अब अपने बयानों को लेकर भी सवालों के घेरे में आ गए हैं। आरोपों से घिरे इस पूरे मामले में जहां पारदर्शिता की उम्मीद थी वहीं द्विवेदी के ताज़ा बयान ने विवाद को और भड़का दिया है।
मंगलवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने खुली बहस की चुनौती स्वीकार करते हुए हेमंत द्विवेदी को उत्तरांचल प्रेस क्लब में आमंत्रित किया था लेकिन द्विवेदी वहां पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। इसके ठीक अगले दिन देहरादून में प्रेस वार्ता कर उन्होंने गोदियाल पर राजनीति करने का आरोप तो लगा दिया लेकिन सीधे सवालों से बचते नजर आए।
सबसे ज्यादा हैरानी तब हुई जब हेमंत द्विवेदी ने प्रमोद नौटियाल को अपना निजी सचिव मानने से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि वह बीकेटीसी अध्यक्ष कार्यालय का निजी सचिव है। यानी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश साफ दिखाई दी।
विवाद यहीं नहीं थमा। जब पत्रकारों ने राम मंदिर से जुड़े मामले में इस्तीफों का हवाला देते हुए बद्रीनाथ प्रकरण में भी नैतिक जिम्मेदारी लेने का सवाल पूछा तो द्विवेदी का जवाब चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा –
बद्रीनाथ, राम मंदिर की फ्रेंचाइज़ी नहीं है।
इस बयान ने पूरे मामले को और गरमा दिया। पत्रकारों ने जब पलटकर पूछा कि मंदिर फ्रेंचाइज़ी कब से होने लगे तो अध्यक्ष के पास कोई जवाब नहीं था और वह निरुत्तर हो गए।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या बीकेटीसी अध्यक्ष गंभीर आरोपों के बीच जवाबदेही से बचने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं। खुली बहस से दूरी और विवादित टिप्पणियां कहीं न कहीं उनकी भूमिका और जवाबदेही पर और बड़े सवाल खड़े कर रही हैं।



