जोशीमठ स्थिरीकरण कार्यों में अनियमितताओं का आरोप, NDMA से उच्चस्तरीय जाँच की मांग

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जोशीमठ स्थिरीकरण कार्यों में अनियमितताओं का आरोप, NDMA से उच्चस्तरीय जाँच की मांग

चमोली | 10 अगस्त 2026

जोशीमठ में भू-धंसाव स्थिरीकरण कार्यों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) को पत्र भेजकर चल रहे कार्यों में गंभीर अनियमितताओं और गुणवत्ता मानकों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।साथ ही जाँच पूरी होने तक संबंधित फर्मों और ठेकेदारों के भुगतान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।

इस दौरान समिति के प्रतिनिधियों ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर जोशीमठ के एसडीएम चंद्रशेखर वशिष्ठ के माध्यम से सरकार को ज्ञापन प्रेषित किया।

पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2023 की आपदा के बाद केंद्र सरकार और NDMA द्वारा जोशीमठ के स्थिरीकरण और पुनर्वास के लिए ₹1,640 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई थी। लेकिन धरातल पर हो रहे कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

समिति का आरोप है कि माइक्रो-पाइलिंग, सोइल नेलिंग और ड्रेनेज प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। डीपीआर और बीओक्यू में तय मानकों की अनदेखी की जा रही है, जिससे भविष्य में फिर से बड़े भू-धंसाव का खतरा बढ़ सकता है।

इसके अलावा बिना किसी पारदर्शी गुणवत्ता जांच और थर्ड-पार्टी ऑडिट के ही ठेकेदारों को भुगतान किए जाने को सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के रूप में बताया गया है।

समिति ने NDMA से मांग की है कि—

  • सभी संबंधित एजेंसियों और ठेकेदारों के भुगतान पर तत्काल रोक लगाई जाए
  • IIT, CBRI या अन्य केंद्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों से उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए
  • स्थानीय प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाए
  • दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए

इसके साथ ही जोशीमठ में ड्रेनेज और सीवेज व्यवस्था को पूरे नगर तक विस्तारित करने, बजट बढ़ाने और प्रभावित परिवारों के शीघ्र पूर्ण पुनर्वास की भी मांग उठाई गई है। समिति ने मुआवजा वितरण में हो रही देरी पर भी चिंता जताई है।

अतुल सती ने कहा कि जोशीमठ का अस्तित्व और यहां के लोगों की सुरक्षा इस परियोजना की गुणवत्ता पर निर्भर करती है, ऐसे में NDMA को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।

पत्र की प्रतिलिपि उत्तराखंड के मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव और जिलाधिकारी चमोली को भी भेजी गई है।

 

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