चमोली ,श्री हेमकुंड साहिब यात्रा की तैयारियां तेज, बर्फ हटाने में जुटी सेना और सेवादार

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श्री हेमकुंड साहिब यात्रा की तैयारियां तेज, बर्फ हटाने में जुटी सेना और सेवादार

अटलकोटी ग्लेशियर पार कर सेना की टीम हेमकुंड साहिब के करीब, कपाट खुलने की तैयारियां तेज

चमोली। श्री हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने की तिथि घोषित होने के बाद अब यात्रा को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं। भारतीय सेना के जवान और गुरुद्वारा के सेवादार कठिन हिमालयी परिस्थितियों में ट्रेक मार्ग से बर्फ हटाने के कार्य में जुटे हुए हैं।

यात्रा के मुख्य पड़ाव घांघरिया में पिछले दो दिनों से हो रही भारी बर्फबारी के बावजूद, भारतीय सेना और सेवादारों की संयुक्त टीम ने घांघरिया से आगे का मार्ग साफ करने का कार्य जारी रखा। सेना की 418 इंडिपेंडेंट फील्ड कंपनी (9 माउंटेन ब्रिगेड) की टीम, सूबेदार के नेतृत्व में, सेवादारों के साथ अटलकोटी ग्लेशियर को सफलतापूर्वक पार कर चुकी है ।

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और अब श्री हेमकुंड साहिब से लगभग 1.5 किलोमीटर की दूरी पर पहुंच गई है। टीम ऊंचाई वाले दुर्गम ट्रेक पर जमी मोटी बर्फ को काटते हुए मार्ग को तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित बना रही है।

वहीं, यात्रा के प्रमुख पड़ाव गोविंदघाट में मुख्य प्रवेश द्वार को भारतीय सेना के जवानों द्वारा रंग-रोगन कर तैयार किया जा रहा है। यह कार्य आर्मी के वाहन (वन-टन गाड़ी) की सहायता से किया जा रहा है। सेना के अनुसार, यह मुख्य गेट उनके जवान मदन सिंह की स्मृति में बनाया गया है, जिन्होंने हेमकुंड साहिब की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

श्री हेमकुंड साहिब और लक्ष्मण लोकपाल मंदिर के कपाट शनिवार, 23 मई 2026 को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। वहीं, प्रथम जत्था 20 मई 2026 को ऋषिकेश से रवाना होगा।

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गौरतलब है कि भारतीय सेना पिछले कई दशकों से हर वर्ष इस दुर्गम क्षेत्र में निःस्वार्थ सेवा देते हुए यात्रा मार्ग को सुगम बनाती रही है, जिससे हेमकुंड साहिब यात्रा सुरक्षित और सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।

गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष सरदार नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने भारतीय सेना और सभी सेवादारों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह संयुक्त प्रयास सेवा और समर्पण की अद्भुत मिसाल है।

लगभग 15,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित श्री हेमकुंड साहिब सिखों का एक अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल है, जो सात बर्फ से ढकी पर्वत चोटियों और पवित्र हेमकुंड झील से घिरा हुआ है।

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ट्रस्ट ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और यात्रा से जुड़ी ताजा जानकारी लेते रहें।

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