बुग्यालों में कैंपिंग की रोक हटने के बाद रूपकुंड ट्रैक के लिए रवाना हुआ पहला दल, वाण में हुआ भव्य स्वागत

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बुग्यालों में कैंपिंग की रोक हटने के बाद रूपकुंड ट्रैक के लिए रवाना हुआ पहला दल, वाण में हुआ भव्य स्वागत

चमोली। उत्तराखंड के बुग्यालों में कैंपिंग पर लगी रोक हटने के बाद पर्यटन और ट्रैकिंग गतिविधियां एक बार फिर शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में रविवार को इंडिया हाइक्स का पहला ट्रैकिंग दल विश्व प्रसिद्ध रूपकुंड ट्रैक के लिए ग्राम पंचायत वाण से रवाना हुआ। दल के वाण पहुंचने पर ग्राम पंचायत और स्थानीय ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से उनका भव्य स्वागत किया और सुरक्षित एवं सफल यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं।

रूपकुंड ट्रैक पर ट्रैकिंग गतिविधियां दोबारा शुरू होने से क्षेत्र के बेरोजगार युवक-युवतियों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों में खासा उत्साह है। ग्रामीणों ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद बुग्यालों में कैंपिंग की गतिविधियां शुरू होने का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि ट्रैकिंग गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय स्तर पर गाइड, पोर्टर, कुक, होमस्टे, घोड़ा-खच्चर संचालन और अन्य पर्यटन सेवाओं से जुड़े लोगों को रोजगार मिलेगा। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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ग्रामीणों ने कहा कि ग्राम पंचायत वाण देश-विदेश से आने वाले यात्रियों और पर्यटकों का हमेशा से स्वागत करती आई है और आगे भी पूरे सम्मान एवं आत्मीयता के साथ उनका स्वागत करती रहेगी। स्थानीय लोगों ने इंडिया हाइक्स का भी आभार जताया और कहा कि कंपनी द्वारा रूपकुंड ट्रैक पर गतिविधियां शुरू करने से क्षेत्र के युवाओं को रोजगार से जोड़ने में मदद मिलेगी।

नंदा राजजात पड़ाव अध्यक्ष वाण हीरा सिंह गढ़वाली ने कहा, रूपकुंड ट्रैक पर पहले दल का रवाना होना पूरे क्षेत्र के लिए खुशी और उम्मीद का अवसर है। इससे स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा और पर्यटन व्यवसाय को नई गति मिलेगी। हम सभी पर्यटकों का स्वागत करते हैं और उनसे बुग्यालों की स्वच्छता एवं प्राकृतिक सुंदरता बनाए रखने में सहयोग की अपील करते हैं।

ग्रामीणों ने पर्यटकों और पर्यटन कंपनियों से अपील की कि हिमालयी बुग्यालों की स्वच्छता, प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि इन संवेदनशील क्षेत्रों की खूबसूरती आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित रह सके।

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