अपनी माता मूर्ति से मिलने पहुंचे भगवान बदरी विशाल, जयकारों से गूंजा धाम; हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ माता मूर्ति मेला
बद्रीनाथ। विश्व प्रसिद्ध श्री बद्रीनाथ धाम में वामन द्वादशी के अवसर पर आयोजित होने वाला ऐतिहासिक एवं पौराणिक माता मूर्ति मेला बुधवार को धार्मिक उल्लास और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर भगवान बदरी विशाल अपनी माता मूर्ति से मिलने माणा गांव के समीप स्थित माता मूर्ति मंदिर पहुंचे। भगवान बदरी विशाल की उत्सव मूर्ति के माता मूर्ति मंदिर पहुंचते ही पूरा क्षेत्र बदरी विशाल के जयकारों से गूंज उठा।
बद्रीनाथ मंदिर से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर माणा गांव के समीप नारायण पर्वत की तलहटी में माता मूर्ति का मंदिर स्थित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रत्येक वर्ष वामन द्वादशी के दिन भगवान बदरी विशाल अपनी माता से मिलने यहां पहुंचते हैं। यह परंपरा अनादि काल से चली आ रही है और बद्रीनाथ धाम की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है।

रावल के संरक्षण में माता मूर्ति मंदिर पहुंची उत्सव मूर्ति
वामन द्वादशी के अवसर पर बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे बाल भोग के बाद बद्रीनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना रोक दी गई। इसके बाद सुबह 10 बजे भगवान बदरी विशाल की उत्सव मूर्ति को शोभायात्रा के रूप में माता मूर्ति मंदिर के लिए रवाना किया गया। उत्सव मूर्ति को रावल के संरक्षण में पैदल माता मूर्ति मंदिर तक ले जाया गया।
माता मूर्ति मंदिर पहुंचने पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान सेना और आईटीबीपी के बैंड की धुनों के बीच बदरी विशाल के जयकारे लगाए गए। बद्री-केदार मंदिर समिति की ओर से माता मूर्ति को राजभोग अर्पित किया गया, जिसे बाद में प्रसाद के रूप में माणा गांव के ग्रामीणों को वितरित किया गया।
मेले में माणा गांव की महिलाओं ने पारंपरिक पौंणा नृत्य प्रस्तुत किया। सेना और आईटीबीपी की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का भी आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों और देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने माता मूर्ति के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और अपनी मनौतियां मांगीं।
तीन बजे संपन्न हुआ मेला, फिर शुरू हुई बद्रीनाथ मंदिर में पूजा
माता मूर्ति मंदिर में पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रमों के बाद दोपहर करीब तीन बजे मेला संपन्न हुआ। इसके बाद भगवान बदरी विशाल की उत्सव मूर्ति की शोभायात्रा वापस बद्रीनाथ मंदिर पहुंची और मंदिर में पूजा-अर्चना दोबारा शुरू की गई।
धर्माधिकारी स्वयंवर सेमवाल ने बताया कि वामन द्वादशी के अवसर पर बाल भोग लगने के बाद बद्रीनाथ मंदिर के कपाट बंद किए गए और उद्धव जी के उत्सव विग्रह की शोभायात्रा माता मूर्ति मंदिर पहुंची। वहां रावल अमरनाथ नंबूदरी ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। पूजा के बाद शोभायात्रा वापस बद्रीनाथ मंदिर पहुंची और इसके बाद मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना पुनः शुरू हुई।
वामन द्वादशी के बाद रावल के आवागमन की परंपरा
माता मूर्ति मेले से जुड़ी एक विशेष धार्मिक परंपरा भी है। मान्यता के अनुसार बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने से लेकर वामन द्वादशी तक मंदिर के मुख्य पुजारी रावल पंचशिला क्षेत्र में रहते हैं और इस अवधि में उनके आवागमन को लेकर विशेष धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है। वामन द्वादशी के बाद रावल के आवागमन की यह विशेष मर्यादा समाप्त हो जाती है और वे अन्य स्थानों पर जा सकते हैं।
लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है माता मूर्ति मेला
बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी वामन द्वादशी के अवसर पर भगवान बदरी विशाल अपनी माता मूर्ति से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि माता मूर्ति मेला गढ़वाल का ऐतिहासिक और पौराणिक मेला है, जो अनादि काल से चला आ रहा है। उन्होंने कहा कि इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता मूर्ति के दर्शन के लिए पहुंचे।

धार्मिक मान्यता के अनुसार माता मूर्ति ने भगवान विष्णु को पुत्र रूप में प्राप्त करने के लिए तपस्या की थी। भगवान विष्णु ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर नर और नारायण के रूप में उनके यहां अवतार लिया। इसी धार्मिक परंपरा और मान्यता से माता मूर्ति तथा बद्रीनाथ धाम का संबंध जुड़ा हुआ है।
मेले के अवसर पर रावल अमरनाथ नंबूदरी, नायब रावल सूर्य प्रकाश नंबूदरी, पूर्व रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी, बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़, पूर्व अधिकारी बी.डी. सिंह, धर्माधिकारी स्वयंवर सेमवाल सहित मंदिर समिति के अधिकारी-कर्मचारी, स्थानीय ग्रामीण और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।







