चमोली में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियाँ पूरी

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चमोली में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियाँ पूरी

चमोली में पंचायत चुनाव : संवेदनशील बूथ, अतिसंवेदनशील बूथ, राज्य का सबसे ऊँचाई पर स्थित बूथ, और दूरस्थ पोलिंग बूथ – सभी जानकारी एक साथ, जानिए बूथों की संख्या और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की संख्या

चमोली : त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी संदीप तिवारी ने सभी तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। जिले में जिला पंचायत की 26, सदस्य क्षेत्र पंचायत की 244, प्रधान ग्राम पंचायत की 615 और सदस्य ग्राम पंचायत 4385 पदों के लिए चुनाव होने हैं।

मतदान केंद्रों की जानकारी

चमोली में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव सम्पन्न कराने के लिए कुल 689 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें से 149 मतदान केंद्र संवेदनशील हैं और 78 अति संवेदनशील मतदान केंद्र हैं। इसके अलावा, 421 दूरस्थ मतदान केंद्र हैं जहाँ पोलिंग पार्टियों को एक दिन पहले रवाना किया जाएगा।
263 मतदान केंद्रों के लिए पोलिंग पार्टियां दो दिन पहले रवाना होंगी और 5 पोलिंग पार्टियों को तीन दिन पहले रवाना किया जाएगा । जिसमें डुमक ,द्रोणागिरी , भेंठा,भरकी, गणाई मतदेय स्थल शामिल हैं ।

पोलिंग पार्टियों की तैनाती

इन सभी 689 मतदान केन्द्रों में चुनाव सम्पन्न कराने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा 4150 कर्मचारियों की तैनाती की गई है। पोलिंग पार्टियों को समय पर और सुरक्षित रूप से मतदेय स्थलों तक पहुँचाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।

दूरस्थ मतदेय स्थलों के लिए विशेष व्यवस्था

उत्तराखंड का सबसे उच्चतम मतदेय स्थल – डुमक और द्रोणागिरी भी चमोली में ही स्थित है, जहाँ आज भी कई किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता है। इन स्थलों पर पोलिंग पार्टियों को समय पर पहुँचाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। डुमक मतदेय स्थल पर सड़क मार्ग बंद होने की स्थिति में 19 किलोमीटर पैदल चलना पड़ेगा, जबकि द्रोणागिरी में 12 किलोमीटर पैदल जाना होगा।

भूस्खलन के कारण अवरुद्ध सड़क मार्गों के लिए व्यवस्था

चमोली में 24 और 28 जुलाई को मतदान होना है। इस दौरान बारिश के कारण मतदान केंद्रों तक जाने वाले सड़क मार्ग भूस्खलन के चलते अवरुद्ध हो सकते हैं। इसके लिए जिला निर्वाचन अधिकारी संदीप तिवारी ने संबंधित विभाग के अधिकारियों व एजेंसियों को निर्देशित किया है कि वे अपने मशीन वहाँ पर तैनात रखें ताकि जल्दी सड़क मार्ग खोल दिए जाएं और पोलिंग पार्टियों को सुरक्षित मतदेय स्थल तक पहुँचने में आसानी हो सके ।

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