टेंडर खुले नहीं तो सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता पर उठे सवाल, पूर्व मंत्री राजेंद्र भंडारी ने लगाए गंभीर आरोप
गोपेश्वर। चमोली जिले में सिंचाई विभाग की ओर से जारी विभिन्न विकास कार्यों के टेंडर को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता राजेंद्र भंडारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता प्रशांत श्रीवास्तव पर टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरतने और अपने चहेते ठेकेदारों को काम देने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
राजेंद्र भंडारी का कहना है कि सरकार की ओर से चमोली जनपद में विभिन्न विकास कार्यों के लिए धनराशि स्वीकृत की गई थी। इसके तहत सिंचाई विभाग ने 19 सितंबर को ऑनलाइन टेंडर जारी किए थे। जिले के विभिन्न ठेकेदारों ने इन कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया। विभाग की ओर से संबंधित टेंडरों की जांच प्रक्रिया भी 21 , 22 सितंबर को पूरी कर ली गई थी।
पूर्व मंत्री का आरोप है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद विभाग ने अभी तक टेंडर ओपन नहीं किए हैं। उनका कहना है कि नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाना चाहिए, लेकिन एक माह बीतने को है और टेंडर खोलने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
भंडारी ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया को लंबित रखने के पीछे विभागीय स्तर पर पारदर्शिता का अभाव है और अधिशासी अभियंता पर अपने चहेते ठेकेदारों को काम दिए जाने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि ऐसी कार्यप्रणाली से जनता और ठेकेदारों के बीच सरकार की छवि प्रभावित होती है।
इन विकास कार्यों के टेंडर पर उठे सवाल
सिंचाई विभाग की ओर से जिन कार्यों के टेंडर जारी किए जाने की बात सामने आई है, उनमें—
1. विकासखंड दशोली के राजकीय प्राथमिक विद्यालय सेमडुंग्रा के भवन का पुनर्निर्माण कार्य — लागत करीब 44 लाख रुपये।
2. विकासखंड पोखरी में प्राथमिक विद्यालय पोखरी के निर्माण कार्य — लागत करीब 64 लाख रुपये।
3. नाबार्ड के अंतर्गत विकासखंड ज्योतिर्मठ की दो पर्वतीय नहरों/गूलों के मलारी पुनरोद्धार का कार्य — लागत करीब 45 लाख रुपये।
4. नाबार्ड के अंतर्गत विकासखंड ज्योतिर्मठ की दो पर्वतीय नहरों/गूलों के झेलम पुनरोद्धार का कार्य — लागत करीब 50 लाख रुपये।
5. चंद्रभागा स्ट्रीमशेड रिजुवेनेशन कार्य — लागत करीब 62 लाख रुपये।
इन सभी कार्यों की कुल अनुमानित लागत करीब 2.65 करोड़ रुपये बताई जा रही है। ऐसे में टेंडर प्रक्रिया के लंबित रहने को लेकर ठेकेदारों और जनप्रतिनिधियों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।
कैमरे के सामने टेंडर प्रक्रिया पर स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए अधिशासी अभियंता
मामले की पड़ताल के लिए जब मीडिया की टीम सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता प्रशांत श्रीवास्तव के कार्यालय पहुंची और उनसे टेंडर प्रक्रिया तथा टेंडर ओपन किए जाने की समयसीमा को लेकर सवाल किया गया, तो वह कैमरे के सामने स्पष्ट जवाब देते नजर नहीं आए।
वीडियो में अधिशासी अभियंता से जब टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद टेंडर ओपन करने की समयसीमा के संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब देने के बजाय रीटेक करने की बात कही। इसके बाद उन्होंने मीटिंग के लिए देर होने का हवाला देते हुए शाम को दोबारा रिकॉर्डिंग करने की बात कही।👇देखें वीडियो
ऐसे में सवाल यह है कि जब विभागीय टेंडर प्रक्रिया नियमों के तहत संचालित हो रही है तो उसकी स्थिति और टेंडर ओपन करने की समयसीमा को लेकर कैमरे के सामने स्पष्ट जानकारी देने में क्या परेशानी है?
उठ रहे ये सवाल
- 19 सितंबर को ऑनलाइन टेंडर जारी किए गए तो अब तक टेंडर ओपन क्यों नहीं हुए?
- 21 सितंबर को जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की प्रक्रिया में देरी क्यों हुई?
- टेंडर खोलने में देरी की विभागीय वजह क्या है?
- क्या सभी ठेकेदारों के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है?
- पूर्व मंत्री द्वारा लगाए गए आरोपों पर विभाग का आधिकारिक पक्ष क्या है?
- यदि प्रक्रिया नियमों के अनुसार है तो विभाग टेंडर की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक क्यों नहीं करता?
फिलहाल इस पूरे मामले में पूर्व मंत्री राजेंद्र भंडारी की ओर से लगाए गए आरोपों और विभागीय टेंडर प्रक्रिया में हुई देरी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारी इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देते हैं और क्या लंबित टेंडरों की प्रक्रिया को लेकर स्थिति सार्वजनिक की जाती है।





