घोटालों के आरोपों में घिरे 3 अफसरों को 15 हजार करोड़ की परियोजनाओं की जिम्मेदारी

घोटालों के आरोपों में घिरे 3 अफसरों को 15 हजार करोड़ की परियोजनाओं की जिम्मेदारी
भाजपा नेता ने ही खोला मोर्चा, नियमों को ताक पर रखकर तैनाती का आरोप
देहरादून।
केंद्र और राज्य सरकार की अतिमहत्वाकांक्षी शारदा कॉरिडोर, हरिद्वार गंगा कॉरिडोर और ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर परियोजनाओं में करोड़ों रुपये के घोटालों के आरोपों में घिरे अधिकारियों की तैनाती को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह आरोप विपक्ष ने नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेता ने ही लगाए हैं।
भारतीय जनता युवा मोर्चा उत्तराखंड के जिला उपाध्यक्ष (अनुसूचित जनजाति), पिथौरागढ़ कमल दास ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज, मुख्य सचिव सहित उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर इस मामले की शिकायत की है। उन्होंने घोटालों के आरोपों में घिरे तीन अधिकारियों की नियुक्ति को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
15 हजार करोड़ की योजनाएं, आरोपित अफसरों को जिम्मेदारी
पत्र में कहा गया है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट माने जा रहे शारदा कॉरिडोर, हरिद्वार गंगा कॉरिडोर और ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर के तहत उत्तराखंड में करीब 15 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग के अंतर्गत उत्तराखंड परियोजना विकास एवं निर्माण निगम लिमिटेड (UPDCCL) को सौंपी गई है, जिसके लिए पीआईयू (प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट) का गठन किया गया है।
कमल दास का आरोप है कि इन पीआईयू में सिंचाई विभाग से ऐसे तीन अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर तैनात किया गया है, जिन पर करोड़ों रुपये के घोटालों के आरोप हैं और जिनके खिलाफ एसआईटी जांच चल रही है। इतना ही नहीं, शासन की ओर से उन्हें आरोप पत्र भी जारी किए जा चुके हैं।
इन अधिकारियों पर हैं गंभीर आरोप
शिकायत के अनुसार:
- मनोज सिंह (अधीक्षण अभियंता) पर सूर्यधार बैराज निर्माण सहित हरिद्वार और पिथौरागढ़ में पूर्व में कराए गए कार्यों में करोड़ों रुपये के घोटालों के आरोप हैं। वर्तमान में वे जांच का सामना कर रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें पीआईयू-3 का महाप्रबंधक नियुक्त किया गया है।
- विवेक शर्मा (सहायक अभियंता) पर सिंचाई खंड काशीपुर में 7 से 8 करोड़ रुपये के घपले के आरोप हैं। एसआईटी जांच लंबित होने के बावजूद उन्हें पीआईयू-3 का प्रबंधक बनाया गया है।
- अरुण नेगी (सहायक अभियंता) पर भी सिंचाई खंड काशीपुर में घोटालों के आरोप हैं और जांच जारी है। इसके बावजूद उन्हें पीआईयू-3 में सहायक प्रबंधक का दायित्व सौंपा गया है।
बिना मंत्री की मंजूरी के तैनाती का आरोप
भाजपा नेता ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि इन अधिकारियों की तैनाती शासन या सिंचाई मंत्री के अनुमोदन के बिना, नियमों के विपरीत, सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता सुभाष चंद्र द्वारा अपने स्तर पर की गई है। जबकि नियमानुसार ऐसी नियुक्तियों के लिए सचिव सिंचाई और सिंचाई मंत्री की स्वीकृति अनिवार्य होती है।
सरकार की छवि को नुकसान की चेतावनी
कमल दास ने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे अधिकारियों को इतनी बड़ी और संवेदनशील परियोजनाओं की जिम्मेदारी देना सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन’ नीति पर सवाल खड़े करता है। इससे न केवल सरकार की छवि जनता के बीच खराब होगी, बल्कि ईमानदार अधिकारियों का मनोबल भी प्रभावित होगा।
उन्होंने मांग की है कि देवभूमि उत्तराखंड की गरिमा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ईमानदार छवि को ध्यान में रखते हुए इन तीनों अधिकारियों की नियुक्ति और द्वैध कार्यभार के आदेश तत्काल निरस्त किए जाएं तथा उनकी जगह निष्पक्ष और ईमानदार अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जाए।



