ग्राम प्रधान से कैबिनेट मंत्री तक: भरत सिंह चौधरी का संघर्ष और सियासी सफर

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ग्राम प्रधान से कैबिनेट मंत्री तक: भरत सिंह चौधरी का संघर्ष और सियासी सफर
देहरादून/रुद्रप्रयाग। Bharat Singh Chaudhary का राजनीतिक जीवन संघर्ष, धैर्य और निरंतर प्रयासों की मिसाल है। ग्राम प्रधान से अपने सियासी करियर की शुरुआत करने वाले चौधरी आज उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री बनकर एक नई ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। उनका यह सफर बताता है कि लगातार प्रयास और दृढ़ इच्छाशक्ति से आखिरकार मंजिल हासिल की जा सकती है।

रुद्रप्रयाग जनपद के गड़बू गांव (हरियाली क्षेत्र) के मूल निवासी भरत सिंह चौधरी ने घोलतीर नगरासू में बसावट की और 80 के दशक में मवाणा के ग्राम प्रधान के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। इसके बाद उन्होंने कर्णप्रयाग ब्लॉक प्रमुख पद के लिए दावेदारी की, जहां उन्हें तत्कालीन कांग्रेस सांसद Chandra Mohan Singh Negi का समर्थन मिला, लेकिन वह चुनाव हार गए।
लगातार हार, फिर भी नहीं छोड़ी राजनीति
चौधरी ने 1989 में जनता दल के टिकट पर कर्णप्रयाग विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं मिली। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार चुनाव लड़ते रहे। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद 2002 में कांग्रेस से टिकट विवाद के बीच उन्होंने चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी।
सियासत में कई बार असफलताओं के बावजूद चौधरी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अंततः उन्होंने 2015 में B. C. Khanduri के साथ जुड़कर भाजपा का दामन थामा। इसके बाद 2017 में भाजपा ने उन्हें रुद्रप्रयाग से टिकट दिया, जहां उन्होंने पहली बार जीत हासिल कर विधानसभा में प्रवेश किया। 2022 में भी उन्होंने जीत दोहराई।
अब कैबिनेट मंत्री बनने का मुकाम
शुक्रवार को हुए उत्तराखंड मंत्रिमंडल विस्तार में Pushkar Singh Dhami ने भरत सिंह चौधरी को कैबिनेट मंत्री बनाया। इस तरह पांच बार विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी हार न मानने वाले चौधरी आज सत्ता के अहम पद पर पहुंच गए हैं।
उनकी पत्नी भुवना चौधरी भी जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं, जिससे उनके परिवार का भी स्थानीय राजनीति में प्रभाव रहा है। चमोली और रुद्रप्रयाग दोनों जिलों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
मंत्रिमंडल में गढ़वाल का दबदबा
मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद गढ़वाल क्षेत्र का दबदबा साफ नजर आ रहा है। 12 सदस्यीय मंत्रिमंडल में 8 मंत्री गढ़वाल से हैं, जबकि कुमाऊं से केवल 4 मंत्री शामिल हैं।
पहले से ही मंत्रिमंडल में Satpal Maharaj, Dhan Singh Rawat, Ganesh Joshi और Subodh Uniyal गढ़वाल का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। नए विस्तार में Bharat Singh Chaudhary, Khajan Das, Madan Kaushik और Pradeep Batra को शामिल किया गया है।
वहीं कुमाऊं क्षेत्र से केवल Ram Singh Kaida को ही मंत्रिमंडल में जगह मिली है।
संतुलन साधने की कोशिश
मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन बनाने की कोशिश भी साफ दिखती है। कुल 12 मंत्रियों में:
- 4 ब्राह्मण
- 5 ठाकुर
- 2 दलित
- 1 पंजाबी समुदाय से
मैदान और पहाड़ के आधार पर:
- 5 मंत्री मैदान क्षेत्र से
- 7 मंत्री पहाड़ी क्षेत्रों से
2027 पर टिकी नजरें
मंत्रिमंडल गठन को संतुलित माना जा रहा है, लेकिन अब असली परीक्षा 2027 के विधानसभा चुनाव में होगी। नए और पुराने मंत्रियों का प्रदर्शन ही तय करेगा कि भाजपा आगे कितनी मजबूती से अपनी पकड़ बनाए रखती है।
कुल मिलाकर, भरत सिंह चौधरी की कहानी संघर्ष, धैर्य और राजनीतिक प्रतिबद्धता की मिसाल है—जहां कई हार के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार कैबिनेट मंत्री बनकर अपनी पहचान स्थापित की।



